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24 घंटे में दूसरी अपील: पेट्रोल-डीजल सावधानी से खर्च करें पीएम मोदी
May 11, 2026 Source: India Scope Media
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देशवासियों से आर्थिक अनुशासन और संसाधनों के समझदारीपूर्ण उपयोग की अपील की है। उन्होंने लगातार दूसरे दिन लोगों से सोने की खरीद कम करने का आग्रह किया और कहा कि भारत को भारी मात्रा में सोने के आयात पर विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ता है। पीएम मोदी के अनुसार, हर नागरिक को देशहित में अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए और ऐसे खर्चों को नियंत्रित करना चाहिए जिनसे विदेशी मुद्रा बाहर जाती है।
इसके साथ ही उन्होंने पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने पर भी जोर दिया। गुजरात के वडोदरा में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि लोगों को जहां संभव हो, निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करना चाहिए। इससे न केवल ईंधन की बचत होगी, बल्कि देश के आयात बिल पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। उन्होंने सरकारी और निजी संस्थानों से वर्चुअल मीटिंग और वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने की भी अपील की, ताकि ऊर्जा की खपत को कम किया जा सके।
प्रधानमंत्री ने खाने के तेल के आयात पर भी चिंता जताई और लोगों से स्थानीय उत्पादों को अपनाने की अपील की। उन्होंने ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को मजबूत करने पर जोर देते हुए कहा कि घरेलू उत्पादों को बढ़ावा देने से देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और विदेशी निर्भरता कम होगी।
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने यह भी कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय तनावों के बीच आर्थिक स्थिरता बनाए रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने नागरिकों से एक वर्ष तक सोने की खरीद से बचने की भी अपील की थी, ताकि देश की आर्थिक स्थिति पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
वडोदरा दौरे के दौरान प्रधानमंत्री ने कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन भी किया, जिनमें शिक्षा और बुनियादी ढांचे से जुड़ी योजनाएं शामिल थीं। उन्होंने कहा कि ये परियोजनाएं युवाओं को बेहतर अवसर प्रदान करेंगी और क्षेत्रीय विकास को गति देंगी।
इसके अलावा, प्रधानमंत्री ने हालिया चुनाव परिणामों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन नतीजों से देश में नया उत्साह पैदा हुआ है। उन्होंने गुजरात की राजनीतिक स्थिरता और विकास मॉडल की सराहना करते हुए कहा कि यही राज्य की प्रगति का मुख्य आधार रहा है।
कुल मिलाकर, पीएम मोदी का संदेश आर्थिक अनुशासन, ऊर्जा संरक्षण, स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में सामूहिक प्रयासों पर केंद्रित रहा।